पंजाब

पंजाब में नियमित DGP की नियुक्ति पर उठे सवाल, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बीच प्रशासनिक सुधारों पर फिर छिड़ी बहस

चंडीगढ़/नई दिल्ली: पंजाब में पिछले तीन वर्षों से कार्यवाहक (Acting) पुलिस महानिदेशक (DGP) के रूप में कार्य कर रहे गौरव यादव की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राज्यों में लंबे समय तक कार्यवाहक डीजीपी रखने की व्यवस्था पर चिंता जताते हुए इसे संस्थागत व्यवस्था के लिए उचित नहीं माना है। विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले की भावना के अनुसार राज्यों में नियमित प्रक्रिया के तहत पूर्णकालिक डीजीपी की नियुक्ति की जानी चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार को योग्य अधिकारियों का पैनल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजना चाहिए, ताकि नियमों के अनुसार नियमित नियुक्ति हो सके।

इसी बीच केंद्र सरकार की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। वर्ष 2018 में शुरू की गई लेटरल एंट्री व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों में विशेषज्ञों को शामिल कर नीति निर्माण को मजबूत बनाना था। हालांकि अब तक सीमित संख्या में ही नियुक्तियां होने के कारण इसकी प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, केंद्र सरकार ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सांसदों (MPs) के पत्रों का समय पर और तथ्यात्मक जवाब दें। अधिकारियों से कहा गया है कि केवल पूर्व-निर्धारित या कॉपी-पेस्ट जवाब भेजने की बजाय प्रत्येक मामले के अनुसार स्पष्ट और जिम्मेदार प्रतिक्रिया दी जाए। विश्लेषकों का मानना है कि नियमित डीजीपी की नियुक्ति, प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही जैसे मुद्दे सुशासन से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। ऐसे में इन पर समयबद्ध और नियम आधारित निर्णय प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

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