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12 जून 2025 का वो काला दिन: एयर इंडिया हादसे के पीछे ‘इलेक्ट्रॉनिक फेल्योर’ सबसे बड़ी वजह? नई रिपोर्ट ने किया पर्दाफाश।

पिछले साल 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रहे एयर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान हादसे ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था। इस भीषण दुर्घटना में 260 मासूम जिंदगियां खत्म हो गई थीं। अब इस मामले में एक अंतरराष्ट्रीय विमान सुरक्षा समूह, ‘फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी’ (FAS) ने अमेरिकी सीनेट की उपसमिति को एक विस्तृत प्रजेंटेशन भेजा है, जिसमें विमान की सुरक्षा पर बेहद डरावने दावे किए गए हैं।

पहले दिन से ही ‘खतरनाक’ था विमान? बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, FAS ने दावा किया है कि यह विशेष एयरक्राफ्ट एयर इंडिया के बेड़े में शामिल होने के पहले दिन से ही गंभीर तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा था। आंतरिक दस्तावेजों के विश्लेषण से पता चला है कि विमान के क्वालिटी मेंटेनेंस और इंजीनियरिंग में भारी लापरवाही बरती गई थी।

रिपोर्ट में किए गए प्रमुख तकनीकी खुलासे:

  1. पावर सिस्टम की खराबी: विमान के इलेक्ट्रॉनिक और सॉफ्टवेयर सिस्टम में बार-बार दिक्कतें आ रही थीं। इसकी वायरिंग अक्सर शॉर्ट सर्किट का शिकार होती थी और सर्किट ब्रेकर बिना वजह ट्रिप (Trip) हो रहे थे।

  2. ओवरहीटिंग की समस्या: विमान के पावर सिस्टम के पुर्जे सामान्य से कहीं अधिक गर्म हो रहे थे, जो कि एक बड़ी आग लगने का संकेत था।

  3. फ्रैंकफर्ट की पुरानी घटना: रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि जनवरी 2022 में फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर उतरते समय इसी विमान के P100 पावर डिस्ट्रीब्यूशन पैनल में आग लग गई थी। यह पैनल विमान के इंजन से पैदा होने वाली हाई-वोल्टेज बिजली को पूरे विमान में बांटता है। उस समय नुकसान इतना अधिक था कि पूरे पैनल को बदलना पड़ा था।

जांच के घेरे में बोइंग और एयर इंडिया वर्तमान में भारत का विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) इस हादसे की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। चूंकि विमान का डिजाइन और निर्माण अमेरिका में हुआ था, इसलिए अमेरिकी अधिकारी भी इस जांच में सक्रिय रूप से शामिल हैं। FAS का दावा है कि यदि इन तकनीकी चेतावनियों को समय रहते गंभीरता से लिया गया होता, तो 260 लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

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