2022-06-28

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 1984 सिख दंगों में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्रकैद

डेस्क। 1984 सिख दंगों में दिल्ली छावनी के राजनगर पालम इलाके में एक नवंबर 1984 को पांच सिखों की हत्या से जुड़े मामले में अदालती फैसले के खिलाफ सात अपीलों पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

सज्जन कुमार को 31 दिसंबर तक आत्मसमर्पण करना होगा। इससे पहले निचली अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया था। साथ ही दिल्ली हाईकोर्ट ने अन्य दो दोषियों की सजा 3 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी है। सज्जन कुमार के अलावा अदालत ने कैप्टन भागमल, पूर्व पार्षद बलवान यादव और गिरधारी लाल को भी उम्र कैद की सजा सुनाई गई है।

सज्जन कुमार को दोषी करार देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि “1947 की गर्मियों में विभाजन के दौरान बहुत सारे लोगों का कत्लेआम किया गया था। उसके ठीक 37 साल बाद दिल्ली फिर वैसी ही त्रासदी का गवाह बनी। आरोपी को राजनीतिक लाभ मिला और वह ट्रायल से बचता रहा।

तत्कालीन प्रधानमंत्री की हत्या के बाद अविश्वसनीय रूप से 2700 सिखों का कत्लेआम सिर्फ दिल्ली में कर दिया गया। न्याय व्यवस्था निश्चित रूप से धराशायी हुई जिसके बाद लोगों ने कानून अपने हाथ में ले लिया। इसकी टीस आज भी महसूस की जाती है। अदालत ने कहा कि, 1984 में 1 से 4 नवंबर तक दिल्ली और पूरे देश में सिखों का नरसंहार हुआ जो राजनीतिक अभिनेताओं द्वारा रचा गया था और कानून व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों के सहयोग से हुआ, ये अपने आप में ”मानवता के खिलाफ अपराध” है।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा मिलने पर कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला स्वागत योग्य है। यह हम जैसे उन सबके लिए सबसे भयावह नरसंहार है जो उसके गवाह रहे हैं। उस समय की कांग्रेस सरकारें लगातार इसे ढंकने का काम करती रहीं। उन्होंने कहा कि अब वह सारे प्रयास परास्त हो चुके हैं। सज्जन कुमार सिख विरोधी दंगों के सिंबल हैं। 1984 के सिख दंगों की विरासत कांग्रेस और गांधी परिवार की गर्दन के चारों ओर लटकी है। वित्त मंत्री ने कहा, ये विडंबना है कि ये आया उस दिन है कि जबक सिख समाज जिस दूसरे नेता को दोषी मानता है, कांग्रेस उसे मुख्यमंत्री की शपथ दिला रहा है।

सज्जन कुमार की सजा के बाद केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया है। उन्होंने कहा कि मैं पीएम मोदी का शुक्रिया अदा करना चाहती हूं कि उन्होंने शिरोमणि अकाली दल की विनती पर 2015 में 1984 के नरसंहार पर जांच करने के लिए एक एसआईटी का गठन किया। यह एक ऐतिहासिक फैसला है। आखिरकार न्याय का पहिया घूम गया। कौर ने कहा कि, कांग्रेस नेता और पीएम के करीबी सिखों के घरों तक पुलिस के साथ गए। यहां तक कि आज भी जब मैं वो सब सोचती हूं तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बच्चों बिलख रहे थे, वह एक शब्द नहीं बोल पा रहे थे। मुझे आज भी वो सब याद है।

बीजेपी नेता संबित पात्रा ने इस मामले में कहा कि राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। कमलनाथ जी का नाम नानावती कमीशन की रिपोर्ट में गवाह के रूप में और एक एफिडेविट में भी है। सिख विरोधी दंगों में शामिल एक शख्स को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया गया। राहुल गांधी को कमलनाथ को पार्टी से निकाल देना चाहिए।

क्या है मामला
इस मामले में दोषियों ने अपनी सजा और सीबीआई ने इस मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। दंगा पीड़ित जगदीश कौर ने भी सज्जन कुमार की रिहाई को चुनौती दे रखी थी।

न्यायमूर्ति एस. मुरलीधर व न्यायमूर्ति विनोद गोयल ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 29 अक्तूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। निचली अदालत ने 30 अप्रैल 2013 को सज्जन कुमार को बरी कर दिया था तथा पूर्व पार्षद बलवान खोखर, कैप्टन भागमल व गिरधारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सिख दंगा मामलों की सुनवाई करते हुए 29 मार्च 2017 को पहले बंद हो चुके पांच मामलों में बलवान खोखर व महेंद्र यादव समेत 11 लोगों को नोटिस जारी किया था। अदालत ने इनसे पूछा था कि क्यों न इन मामलों में दोबारा जांच व सुनवाई करवाई जाए, क्योंकि उन पर बेहद गंभीर आरोप हैं।

सीबीआई की ओर से अपील पर जिरह करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा ने कहा था कि जस्टिस आरएन मिश्रा जांच आयोग के समक्ष सज्जन कुमार के खिलाफ 17 हलफनामे दिए गए थे लेकिन उन पर एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ था।

एनडीए सरकार ने इन मामलों की जांच के लिए जस्टिस नानावटी जांच आयोग बनाया था। इस आयोग ने दिल्ली छावनी व पुल बंगश इलाकों में हुई हत्याओं की जांच दोबारा कराने की सिफारिश की थी। इसके बाद इन मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने जांच के बाद इन मामलों में वर्ष 2010 में कड़कड़डूमा जिला अदालत में दो आरोप पत्र दाखिल किए थे।

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