2022-06-28

अलीगढ़: ‘गुड़िया’ के लिए घर का हर सामान खिलौना, मेरी बेटी को न्याय दिला दो, हत्यारों को फांसी की सजा

अलीगढ़। टप्पल की ‘गुड़िया’ के लिए घर का हर सामान खिलौना होता था। पानी की बोतल के साथ खूब खेलती थी। सामान की फेंका-फेंकी में मम्मी डांटतीं तो रूठकर पापा की गोद में चली जाती थी। जरा सा दुलार मिलते ही सो जाती थी। ‘गुड़िया’ के बिना आज आंगन सूना है। मां मोबाइल में उसके फोटो देखकर यादों में खो जाती है।

हंसमुख चेहरे वाली बेटी मां-बाप की दुलारी थी। इकलौती होने के कारण मां-बाप ही नहीं, बाबा, चाचा-चाची सबकी प्यारी थी। दस दिन पहले बेटी को खो चुकी मां शुक्रवार को घर में बेसुध थी। मीडिया के सवालों का जवाब देते समय बस यही कहतीं, मेरी बेटी को न्याय दिला दो। हत्यारों को फांसी की सजा दो।

घर में बिखरे बर्तनों को इकट्ठा कर धुलाई के लिए रखना, खाना खा रहे लोगों को पानी की बोतल देना, ये ऐसे काम थे, जिनसे सभी प्रभावित थे। नहाने के बाद कपड़े अपनी ही पसंद के पहनती थी।

खेलने के लिए अपने घर के साथ सामने ही बाबा के मकान में जाती थी। इसके अलावा किसी और घर में नहीं जाती थी। घटना वाले दिन भी वहीं खेल रही थी। पूरे परिवार के लिए मासूम की यादें ही आज शेष हैं, जिन्हें याद कर हर कोई सिहर जाता है।

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