वर्ष 2002 की वोटर लिस्ट से किया जा रहा मतदाताओं का मिलान

पंजाब में आगामी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से पहले मतदाता सूची की प्री-मैपिंग प्रक्रिया तेजी से जारी है। राज्यभर में अब तक 84 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। चुनाव आयोग और संबंधित विभाग इस प्रक्रिया को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए लगातार निगरानी कर रहे हैं।
राज्य में सबसे बेहतर प्रदर्शन मानसा जिले का रहा है, जहां 93.72 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पूरी हो चुकी है। वहीं मोहाली (एसएएस नगर) जिला इस मामले में सबसे पीछे चल रहा है, जहां अब तक केवल 65.88 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है। चुनाव विभाग ने सभी जिलों के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अधिकारियों (ERO) को निर्देश दिए हैं कि वे बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के साथ समन्वय बनाकर जल्द से जल्द यह कार्य पूरा करवाएं, ताकि 25 जून से पंजाब में SIR प्रक्रिया सुचारु रूप से शुरू की जा सके।
जानकारी के अनुसार, देश में वर्ष 2002 से 2004 के बीच स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन हुआ था, जबकि पंजाब में यह प्रक्रिया वर्ष 2003 में कराई गई थी। अब मौजूदा प्री-मैपिंग अभियान के तहत वर्ष 2005 की मतदाता सूची का मिलान वर्ष 2002 की सूची से किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में मतदाताओं का एक तरह से वंशावली विश्लेषण किया जा रहा है। बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं के नाम का मिलान पुरानी वोटर लिस्ट से कर रहे हैं। यदि किसी व्यक्ति का नाम वर्ष 2003 की सूची में नहीं मिलता, तो उनके पिता, दादा या अन्य रक्त संबंधियों के नाम तलाशे जा रहे हैं ताकि यह प्रमाणित किया जा सके कि उनके परिवार के सदस्य पहले से पंजाब के मतदाता रहे हैं।
प्रवासी मतदाताओं के मामलों में यदि उनके रिश्तेदारों का नाम पंजाब की पुरानी मतदाता सूची में नहीं मिलता, तो अन्य राज्यों की वर्ष 2002 और 2004 की मतदाता सूचियों में उनका रिकॉर्ड खोजा जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित व्यक्ति भारतीय मतदाता परिवार से जुड़ा हुआ है। जिलावार आंकड़ों की बात करें तो तरनतारन में 93.01 प्रतिशत, श्री मुक्तसर साहिब में 92.38 प्रतिशत, बरनाला में 91.29 प्रतिशत और मालेरकोटला में 89.21 प्रतिशत मैपिंग पूरी हो चुकी है। वहीं लुधियाना में 73.64 प्रतिशत और मोहाली में सबसे कम 65.88 प्रतिशत कार्य हुआ है।
पूरे पंजाब में कुल 2,14,59,201 मतदाताओं में से 1,80,32,126 मतदाताओं का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से किया जा चुका है, जबकि 34,27,075 मतदाताओं का सत्यापन अभी बाकी है। प्री-मैपिंग के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ क्षेत्रों में कार्य धीमा चल रहा था। जांच में पता चला कि कुछ बीएलओ बीमार हैं, कुछ की शादी हो चुकी है और कुछ महिला कर्मचारी गर्भवती हैं। ऐसे कर्मचारियों को बदलकर नए बीएलओ नियुक्त किए गए हैं। विभाग ने निर्देश दिए हैं कि सुस्त कार्य करने वाले बीएलओ की रोजाना समीक्षा की जाएगी। चुनाव विभाग ने आम जनता से भी सहयोग की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि यह प्रक्रिया एक तरह की तैयारी और डेटा सत्यापन अभियान है, इसलिए मतदाता बीएलओ का सहयोग करें और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं।


