देहरादूनबड़ी खबर

अंकिता भंडारी केस में नया मोड़, सुरेश राठौड़ ने नार्को टेस्ट के लिए दी सहमति; VIP एंगल पर सुनवाई

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ा कथित VIP विवाद एक बार फिर चर्चा में है। मामले में पूर्व विधायक सुरेश राठौड़ और अभिनेत्री उर्मिला सनावर की कोर्ट में पेशी तथा नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट से जुड़ी सुनवाई को लेकर लोगों की नजरें न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं। इस बीच सुरेश राठौड़ ने नार्को टेस्ट कराने के लिए सहमति देने की बात कही है।

नार्को टेस्ट के लिए सहमति पत्र दिखाने का दावा

मिली जानकारी के अनुसार, सुरेश राठौड़ नार्को टेस्ट के लिए अपनी सहमति से संबंधित पत्र लेकर देहरादून स्थित अदालत पहुंचे। उन्होंने मीडिया के सामने यह पत्र दिखाते हुए कहा कि वह जांच एजेंसियों को सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उनके इस कदम के बाद मामले से जुड़े कथित VIP एंगल पर चर्चा फिर तेज हो गई है।

राठौड़ ने यह भी कहा कि उन्होंने किसी के खिलाफ आरोप नहीं लगाए हैं। हालांकि, उनसे जब वायरल ऑडियो को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया। ऐसे में ऑडियो की प्रामाणिकता, उसमें कही गई बातों का संदर्भ और उससे जुड़े दावों की पुष्टि जांच के दायरे में महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।

कोर्ट में नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट पर सुनवाई

इस मामले में नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट को लेकर अदालत में सुनवाई होने की बात कही गई है। इन परीक्षणों को लेकर अंतिम स्थिति अदालत की कार्यवाही और संबंधित पक्षों की सहमति के आधार पर स्पष्ट होगी। केवल सहमति पत्र सामने आने से यह नहीं माना जा सकता कि परीक्षण हो चुका है या अदालत ने उसे कराने की अनुमति दे दी है।

नार्को टेस्ट और पॉलीग्राफ टेस्ट अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इनके संबंध में कानूनी अनुमति, स्वैच्छिक सहमति और जांच की परिस्थितियां महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए आगे की कार्यवाही में अदालत का रुख अहम माना जा रहा है।

अंकिता भंडारी केस में VIP एंगल पर फिर निगाहें

अंकिता भंडारी हत्याकांड ने वर्ष 2022 में पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था। मुख्य आपराधिक मामले में दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन कथित VIP एंगल को लेकर उठ रहे सवालों और अलग-अलग दावों के कारण यह मुद्दा समय-समय पर सुर्खियों में आता रहा है।

अब सुरेश राठौड़ की ओर से नार्को टेस्ट के लिए सहमति जताए जाने की खबर के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस संबंध में क्या निर्णय लेती है और जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाती हैं। फिलहाल वायरल ऑडियो और कथित VIP की पहचान से जुड़े दावों को स्वतंत्र पुष्टि के बिना अंतिम तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

मामले की अगली दिशा अदालत की सुनवाई, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच से जुड़े आधिकारिक बयानों पर निर्भर करेगी।

Related Articles

Back to top button